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इंतज़ार

इंतज़ार और सोच का समय, और ख़ुद से यह पूछना कि उसे ज़िंदगी से सच में क्या चाहिए।

मूल थाई से अनुवादित। อ่านต้นฉบับ

मेरी ज़िंदगी में एक ऐसा समय था, जब मुझे लगता था जैसे मैं एक ही जगह पर रुकी हुई हूँ।

मैं अपने भविष्य के बारे में जवाब का इंतज़ार कर रही थी, उस दिन का इंतज़ार कर रही थी जब सब कुछ साफ़ हो जाएगा, और उस दिन का इंतज़ार कर रही थी जब जीवनसाथी के साथ ज़िंदगी का वह सपना, जिस पर मैंने कभी यकीन किया था, सच हो जाएगा।

इंतज़ार करना आसान नहीं होता, क्योंकि जब मैं इंतज़ार कर रही थी, तब भी समय आगे बढ़ता जा रहा था, और मेरी ज़िंदगी को भी आगे चलते रहना था।

मैं ख़ुद से पूछने लगी कि अगर एक दिन वह नहीं हुआ जिसका मैं इंतज़ार कर रही हूँ, तो मेरे पास अपना कहने को क्या बचेगा।

इसलिए मैं काम, पैसे और अपने भविष्य के बारे में ज़्यादा सोचने लगी।

मैं नहीं चाहती थी कि मेरी ज़िंदगी अब और इंतज़ार में ही रुकी रहे। मैं फिर से काम करना चाहती थी, अपनी कमाई चाहती थी, नई-नई चीज़ें सीखना चाहती थी, और फिर से ख़ुद पर भरोसा पाना चाहती थी।

फिर से अपने पैरों पर खड़े होने का मतलब यह नहीं है कि मैं किसी से प्यार नहीं करती, और इसका मतलब यह भी नहीं है कि मैंने प्यार से उम्मीद छोड़ दी है।

बल्कि इसका मतलब है कि मैं समझने लगी हूँ कि रिश्ते में चाहे कुछ भी हो, मेरी ज़िंदगी को आगे बढ़ते रहना है।

मुझे अब भी उम्मीद है, लेकिन इस बार मैं चाहती हूँ कि उस भविष्य में मैं ख़ुद भी शामिल रहूँ।

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